सर्वार्थ सिद्धि योग में रामविवाहोत्सव पंचमी बुधवार को, सीता-राम पूजन से दूर होंगे दुःख

बुधवार को अग्रहण शुक्ल पंचमी के दिन ही त्रेता युग में भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था I इस दिन सीताराम पूजन और दर्शन से मन की सारी अभिलाषा पूर्ण होती है | कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित राकेश झा शास्त्री ने कहा कि रामविवाहोत्सव पंचमी पर इस बार खास संयोग बना है I पंचमी तिथि, श्रवणा नक्षत्र तथा रवि-छत्र योग होने से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है I इसके साथ इस दिन स्थिर लग्न भी है I विवाह पंचमी पर रामचरितमानस का नवाह्य परायण कथा की भी परंपरा है I माता जानकी के प्राकट्य स्थल सीतामढ़ी के धनुषा में इस मौके पर भव्य मेला लगता है I इस दिन वहां स्थित बरगद के पेड़ में महिलाएं सूत बांधती है I विवाहोत्सव पंचमी पर श्री दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्त्रोत एवं दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ करने से वैवाहिक लग्न, स्वास्थ्य तथा दांपत्य जीवन की बाधाएँ नष्ट हो जाती है I इसके साथ ही तुलसी माला पर सीताराम नाम का जाप करने से मनोकामना पूर्ति का वरदान मिलता है I

भगवान राम और माता सीता के पूजन से मनचाहा वर की प्राप्ति

ज्योतिषी राकेश झा के अनुसार विवाह पंचमी पर अति शुभ संयोग बनने से विवाह और पूजन-अर्चन करना अति पुण्य फलदायी होगा I सुहागिन महिलाओं को सीता राम की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी I कुंवारी कन्या को सीताराम की पूजा से मनचाहा वर की प्राप्ति होगी I

ब्रह्माजी ने लिखी थी विवाह की लग्न पत्रिका

पंडित झा ने बताया कि स्वयंबर में धनुष तोड़ने के बाद विवाह की सूचना मिलते ही राजा दशरथ भरत, शत्रुघ्न व अपने मंत्रियों के साथ जनकपुरी आ गए। ग्रह, तिथि, नक्षत्र योग आदि देखकर ब्रह्माजी ने उस पर विचार कर लग्न पत्रिका बनाकर नारदजी के हाथों राजा जनक को पहुंचाई। शुभ मुहूर्त में श्रीराम की बारात आ गई। राम व सीता का विवाह संपन्न होने पर राजा जनक और दशरथ ने एक-दूसरे को प्रसन्तापूर्वक गले लगाए थे ।

विवाह पंचमी का पौराणिक महत्व

ज्योतिषी झा के अनुसार श्रीरामचरितमानस के अनुसार अगहन शुक्ल पंचमी को भगवान राम और जनकपुत्री जानकी का विवाह हुआ था. इस कारण इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है I भगवान राम को चेतना और मां सीता को प्रकृति का प्रतीक माना गया है I ऐसे में दोनों का मिलन इस सृष्टि के लिए अति उत्तम माना गया है I ऐसी मान्यता है कि विवाह पंचमी के दिन भगवान राम और सीता का विवाह कराने से ऐसे जातकों की समस्याएं दूर हो जाती हैं, जिनकी शादी में अड़चनें आ रही हैं I शादी की बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और जिन विवाहित दंपत्तियों के जीवन में परेशानियां हैं, उनकी समस्याएं भी समाप्त हो जाती हैं I विवाह पंचमी के दिन भगवान श्री राम और मां सीता के संयुक्त रूप की उपासनी की जाती है I इस दिन रामचरित मानस और बालकांड में भगवान राम और सीता के विवाह प्रसंग का पाठ करना शुभ माना जाता है I इससे परिवार में सुख का वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है |

द्वारा : पंडित राकेश झा शास्त्री

 

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