लोक-आस्था का अनूठा केन्द्र भागलपुर, खुटाहा का योगिनी-धाम

पुरातन काल से प्रकृति मनुष्य को जीवन-शक्ति प्रदान करता रही है जिसके कारण उसके प्रति विशेष आस्था है। किंतु यही प्रकृति जब बाँहे फैलाये हमारी रक्षा करती है, तो हम श्रद्धावश उसे माँ की तरह पूजने लगते हैं। आज कुछ ऐसी ही मिशाल पेश कर रहा है भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड में स्थित योगिनी-धाम।

योगिनी धाम कोयली-खुटाहा रेलवे हॉल्ट से आधा किमी उत्तर व जगदीशपुर रोड पर स्थित बिरला ओपेन माईंड स्कूल से दो किमी दक्षिण में है। योगिनी धाम का दौरा करने के बाद इतिहासकार डॉ रमन सिन्हा एवं शिव शंकर सिंह पारिजात ने बताया कि आस्था के इस अनोखे स्थल में करीब 400 वर्ष पुराने बरगद के पेड़ की जड़ से आपरूपी बनी देवी की मूर्ति को लोग सदियों से पूजते आ रहे हैं।

इतिहासकार डॉ रमन सिन्हा एवं शिव शंकर सिंह पारिजात ने बताया कि योगिनी माता को इस क्षेत्र के समस्त ग्रामीण रक्षक देवी के रूप में पूजते हैं और मनौतियाँ पूरी होने पर मंजूषा चढ़ाते हैं। बरगद के पेड़ की जड़ से आपरूपी एक जड़-नुमा खोह की आकृति बन गयी है जिससे होकर गाँव की नव विवाहिता कन्याएं सुहाग की रक्षा की कामना हेतु अपने पति के साथ सात बार योगिनी मंदिर की परिक्रमा करती हैं।

स्थल के आविर्भाव के बारे में ग्रामीण बताते हैं कि पुराने समय में यह क्षेत्र जंगलों ले घिरा था।एक बार जब गहनों ले लदी एक नव विवाहिता इधर से जा रही थी तो डाकूओं ने उसे घोर लिया। जब उसने अपनी रक्षा के लिये धरती माँ से प्रर्थना की तो धरती माँ ने उसे अपने में समा लिया जिसकी आधा शरीर जमीन के अंदर और आधा उपर रह गया जो एक देवी की मूर्ति में परिणत हो गया जो आज योगिनी माता के रूप में पूजी जाती है। खुटाहा का योगिनी धाम लोक-आस्था का एक अनूठा केन्द्र है जिसे एक आकर्षक ग्रामीण पर्यटन स्थान बनाया जा सकता है।

_______________________________________________________________________________________________________________________

लेखक : शिव शंकर सिंह पारिजात, भागलपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Cresta WhatsApp Chat
Send via WhatsApp
error: Content is protected !!