अंकिता भारद्वाज : पटना की युवा महिला पत्रकार जिन्होंने पत्रकारिता का चेहरा बदल दिया

आज बिहार मीडिया के लिए जो शोर है, उसमें कुछ पत्रकार ऐसे हैं जो न केवल इस पेशे में बने हुए हैं बल्कि लगातार महत्वपूर्ण और प्रासंगिक खबरें भी दे रहे हैं और इन पत्रकारों के बीच, वे महिलाएँ हैं जो पत्रकारों की आकांक्षा की प्रेरणा बन गई हैं और अपनी मेहनत और लगन के बल पे अपनी पहचान स्थापित कर चुकी है वैसी ही भागलपुर में जन्मी और अभी पटना में दैनिक जागरण में रिपोर्टर के तौर पर काम कर रही अंकिता भारद्वाज ने अपनी पत्रकारिता और सामाजिक कार्यों की वजह से पत्रकारिता का चेहरा बदल दिया है, जो आज के युवाओ के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुकी है ।

 शुरू से ही अच्छी शिक्षा और समाज सेवा को नजदीक से देखने वाली अंकिता के पापा लखन लाल पाठक एक समाज सेवी है और खुद का व्यापार करते है, इनकी माँ साधना पाठक एक गृहिणी है जिन्होंने भूगोल में एम्. ए और बी. एड किया है और इनका छोटा भाई आकाश भारद्वाज अभी पढ़ाई कर रहा है।

अंकिता की प्रारम्भिक शिक्षा दुखन राम डीएवी पब्लिक स्कूल से संपन्न हुई , इसके बाद इन्होने मगध महिला कॉलेज से बैचलर इन मॉस कम्युनिकेशन की उच्च शिक्षा प्राप्त की। अंकिता की रूचि बचपन से ही पत्रकारिता में थी। इनके परिवार वालो ने इनके फैसले का सम्मान किया और निर्णय क्या लेना है इनपे छोड़ दिया। पत्रकारिता में अंकिता ने जो मुकाम हासिल किया है वो सिर्फ मेहनत और लगन के बल पे की है, इस क्षेत्र में आने के निर्णय पे किसी ने विरोध किया और ना ही किसी ने सहयोग किया लेकिन अपने निर्णय और सपनो पे भरोसा करते हुए अंकिता आगे बढ़ती गयी। ये प्रिंट मीडिया से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जाने का मंजिल तय की हुई है, जो इनके मेहनत से बिलकुल संभव दिखता है।

समाज सेवा के लिए अंकिता अपने पापा को अपना प्रेरणास्त्रोत मानती है। आज भी पत्रकारिता के साथ-साथ अंकिता सच का साथ देती है और जरुरतमंदो का हरसंभव सहायता करते रहती है। दोस्तों को समय देना, उनके सुख-दुःख में साथ देना, उनके साथ खाली वक़्त बिताना और स्वादिष्ट खाना अंकिता को बहुत पसंद है। झूठे और मतलबी लोगो से दूर रहना इनको पसंद है। अंकिता पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सफलता का श्रेय ये अपनी माँ और इनके एक चाचा है ए. एस. ठाकुर जो पेशे से वकील है उनको देती है।

पत्रकारिता के साथ ही अंकिता बिहार में महिला सुरक्षा और शिक्षा के लिए कुछ अलग काम करना चाहती है जो वंचित महिलाओ के लिए लाभप्रद हो सके। अंकिता अपनी पत्रकारिता और सामाजिक कार्य से जुडी एक घटना के बारे में बताते हुए अंकिता कहती है की “एक बार में महिला हेल्पलाइन में एक स्टोरी करने गई थी वहां पर गुड़िया नाम की एक लड़की है जो राजीव नगर की रहने वाली थी और उसके नाना-नानी सिपारा में रहते थे, वो लड़की पढ़ना चाहती थी लेकिन उसके पेरेंट्स ने जबरदस्ती उसकी शादी 18 साल के पहले ही तय कर दी थी, उसने बस दसवीं की परीक्षा ही पास की थी उसने महिला हेल्पलाइन में आकर गुहार लगाई कि उसे अभी शादी नहीं करनी है, उसे पढ़ाई करनी है, उस वक्त मैं वहीं पर थी मुझे लगा मुझे इस लड़की की मदद करनी चाहिए और मैंने अपने एक सीनियर रिपोर्टर सुधीर सिंह की मदद ली और उसका एडमिशन टीपीएस कॉलेज में करवाई, अभी वह लड़की इकोनॉमिक्स ऑनर्स कर रही है। इस घटना से मुझे बस यही लगता है कि अगर अपने अनुसार आप किसी की मदद करना चाहते हैं तो उसके लिए सिर्फ पैसा ही जरूरी नहीं होता आप उसकी मदद उसकी इच्छा पूरी कर के भी कर सकते हैं जैसे उस लड़की की इच्छा थी पढ़ने की और आज तक उस लड़की को हम लोग पढ़ा रहे हैं । आगे अंकिता बताती है की “मैंने ज्यादातर महिलाओं से जुड़े क्राइम को ही देखा है उन पर ही खबर बनाई है इसलिए मैं एक और घटना बताना करना चाहूंगी महिला आयोग में एक बार मैंने देखा कि एक पीड़ित परिवार है जो आर्थिक रूप से कमजोर तो नहीं है लेकिन उन्हें पता नहीं था कि कैसे केस करना है ? और क्या करना है ?उनकी बहू गलत थी और बहुत बड़ी थी जो केस करने आई थी, उनकी बेटी दोनों पटना से बाहर थी और आयोग में उनकी लाइन बहुत लंबी थी, आयोग में होता क्या है आपके फाइल के अनुसार आपको बुलाया जाता है तो मैंने उनकी मदद की और आज भी उन आंटी को कभी भी जरूरत होती है क्योंकि के साथ भी आयोग में चल रहा है और उनकी बेटियों के पास भी मेरा नंबर है कभी भी आंटी को जरूरत होती है ऑफीशियली-अनऑफिशियली तो मैं हमेशा मदद के लिए आंटी के पास रहती हूं । 

अपनी सामाजिक कार्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य की वजह से अंकिता को बहुत बार सम्मानित किया जा चुका है और अनेको पुरस्कार भी मिल चुके है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में वैसे युवाओ के लिए जो इस क्षेत्र में भविष्य के लिए योजना प्लान कर रहे हो, और बिहार के युवाओ का भला हो सकता है इसके लिए अंकिता का वैसे संघर्षशील युवाओ के लिए सन्देश है की बस मेहनत से कभी भागना नही चाहिए आज अगर हार रहे तो कल जीत अपनी होगी। अगर हम लगातार आगे बढ़ते रहे तो एक दिन हम हारकर भी जीत जाएंगे छोटे-छोटे कदम बढ़ाते जाओ और आगे बढ़ते जाओ यही सफलता का नियम है, अपने अंदर ईमानदारी का होना बहुत जरूरी है अगर हम खुद के साथ ईमानदार है तो जीवन के किसी न किसी पड़ाव में सफल हो ही जाएंगे

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