“मैंने देखा है…..” – श्रावणी प्रियदर्शिनी की रचना

मैंने देखा है
रूह को जिस्म से अलग होते
सांस को ज़िन्दगी से अलग होते
हाथों से लकीरों को अलग होते
मैंने देखा है, तुमको मुझसे अलग होते

मैंने देखा है
खुशियों को ज़िन्दगी से अलग होते
हँसी को होठो से अलग होते
काजल को आंखों से अलग होते
मैंने देखा है, तुमको मुझसे अलग होते

मैंने देखा है
सूरज को किरणों से अलग होते
शाम को शमा से अलग होते
रात को अंधेरे से अलग होते
मैंने देखा है, तुमको मुझसे अलग होते

मैंने देखा है
खुशबू को गुलाब से अलग होते
अरमानों को दिल से अलग होते
जाम को पैमाने से अलग होते
मैंने देखा है, तुमको मुझसे अलग होते

मैंने देखा है
छाओ को आँचल से अलग होते
ओस की बूंदों को पत्तो से अलग होते
मांझे को पतंग से अलग होते
मैंने देखा है, तुमको मुझसे अलग होते

मैंने देखा है
मिठास को गुड़ से अलग होते
गरमाहट को हाथ से अलग होते
ठंडक को बर्फ से अलग होते
मैंने देखा है, तुमको मुझसे अलग होते

कवयित्री : श्रावणी प्रियदर्शिनी (समस्तीपुर)

 

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