अंशु प्रियदर्शनी : क्रिएटिव विजुअल मर्चेंडाइजिंग एवं पेंटिंग-कला से मिली पहचान

आज के वक़्त में हम जब भी किसी मॉल या शो-रूम में शॉपिंग के लिए जाते है तो सबसे पहले हमारा ध्यान डिसप्ले डेकोरेशन पे जाता है, और डिसप्ले से आकर्षित होकर कई बार ना चाहते हुए भी उस वस्तु को खरीदने पे मजबूर हो जाते है, ऐसे ही डिसप्ले डेकोरेशन यानी विजुअल मर्चेंडाइजिंग की स्पेशलिस्ट है मुजफ्फरपुर की लाड़ली अंशु प्रियदर्शनी जो इस कार्य में कला के बेहतर उपयोग से क्रिएटिव विजुअल मर्चेंडाइजर के क्षेत्र में अपनी सफल पहचान बना चुकी है, जो अपनी कला और योग्यता के बदौलत विजुअल मर्चेंडाइजिंग के द्वारा ग्राहकों को उत्पाद तक खींचकर लुभाने और लाने  के साथ उत्पाद बिक्री के बढ़ोतरी में कंपनी की सहायता करती है ।  

बिहार के मुजफ्फरपुर में होम्योपैथिक डॉक्टर राम लाला प्रसाद एवं सिस्टर इन-चार्ज ज्ञायत्री श्रीवास्तव  के यहाँ जन्मी अंशु को बचपन से ही पेंटिंग कला से विशेष लगाव था और बचपन से ऐसे ही क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती थी जहां पे ये वस्तुओ को सामान्य लुक को गुड लुकिंग में बदलने की महारत को अंजाम दे सके साथ ही पेंटिंग कला में सीखी हुई बारीकियों का बेहतर प्रयोग कर सकें। मुजफ्फरपुर के Sunshine Prep School से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आगे की पढ़ाई पूरी करते हुए बाबासाहब भीमराव आंबेडकर, बिहार यूनिवर्सिटी से English  literature की पढ़ाई खत्म करने के बाद अंशु ने NIFT, Patna से  Master of Fashion Management  का कोर्स सफलतापूर्वक संपन्न की। इसके बाद अंशु ने Max Fashion Retail – Landmark Group में विजुअल मर्चेंडाइजर के रूप में प्रशिक्षु (Trainee) के रूप में काम की, फिर आगे मर्चेंडाइजर के रूप में V-Mart और अभी वर्तमान में Future Group, Delhi में कार्यरत है।  

अंशु ने विजुअल मर्चेंडाइजिंग एवं पेंटिंग-कला के क्षेत्र में अपनी सृजनात्मक क्षमता (Creativity) से सफलता हासिल की है जो इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी योग्यता है, सृजनात्मक क्षमता, विभिन्न उत्पादों को उनके आकार, डिजाइन, रंगों आदि के आधार पर डिसप्ले करने, मैनेक्विन को सही जगह पर सजाकर रखने, शोरूम की साज-सज्जा और लाइट आदि का चुनाव करने के साथ ही अंशु नई चीजों के साथ-साथ बाजार की नब्ज बेहतर तरीके से पहचानती है इस वजह से विजुअल मर्चेंडाइजिंग एवं पेंटिंग-कला के क्षेत्र में अंशु अपना अलग स्थान हासिल कर चुकी है। अंशु ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से विजुअल मर्चेंडाइजिंग एवं पेंटिंग-कला के क्षेत्र से जुड़े हुए नवोदित प्रोफेशनल्स और कलाकारों का मार्गदर्शन करते रहती है। अपने मार्गदर्शन में अंशु विजुअल मर्चेंडाइजिंग एवं पेंटिंग-कला की प्रभावकारी रणनीति और व्यावहारिक तरीका व सामानों को अच्छी तरह से डिसप्ले करने की योजना आदि बताती है। विजुअल मर्चेंडाइजिंग में क्रिएटिविटी के सन्दर्भ में अंशु का कहना है की विजुअल मर्चेंडाइजिंग को अगर छवि बनाने की कला कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें आपका काम क्लाइंट के लिए ऐसी प्रस्तुतीकरण करना होता है कि ग्राहक उसे देखकर सहज ही उस उत्पाद या शोरूम के प्रति आकर्षित हो जाए। मॉल कल्चर के बढ़ते कदमों के कारण डिसप्ले डेकोरेशन अर्थात विजुअल मर्चेंडाइजिंग की मांग ग्राहक संबंधी सभी क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। अब वह चाहे शोरूम हो या फिर रेस्टोरेंट। किसी भी शोरूम में जाने से पहले ग्राहक उसके डिसप्ले बोर्ड पर नजर डालता है। अगर वही नीरस होगा तो वहां जाने का उसका मन ही नहीं करेगा।

 बिहार के फैशन, शिल्प और संस्कृति के उत्थान के लिए भी अंशु के पास योजनाए है जिन्हे ये भविष्य में पूरा करने का इरादा रखती है । अंशु आगे फैशन मैनेजमेंट या विजुअल मर्चेंडाइजिंग में पीएचडी करना चाहती है। इनकी हॉबिस – पुस्तक पढ़ना, पेंटिंग, एवं लेखन (खासकर कविता आदि ) है। अंशु को पेंटिंग, निबंध, क्विज और वाद-विवाद प्रतियोगिता में काफी बार सम्मानित किया जा चूका है। जो भी इंसान अपने दम और योग्यता के बदौलत कुछ भी करता है, वैसे हर इंसान को ये अपना आदर्श मानती है लेकिन प्रेरणास्रोत के रूप में आज भी ये अपनी माँ को देखती है जो वर्किंग वीमेन होते हुए भी घर, परिवार और बच्चो के लिए उपलब्ध रही।

युवाओ को सन्देश देते हुए अंशु का कहना है की “लोगो को अपनी जड़ें मजबूत करनी चाहिए, बच्चो के नैतिक मूल्यों (Moral values) पे ध्यान देना जरुरी है, बनावटीपन से दूर रह कर हक़ीक़त में रहना चाहिए । हम सभी अपने जीवन में विपरीत परिस्थितियों से दो-चार होते रहते हैं। कई बार किसी कार्य को करने के पूर्व या किसी समस्या के सामने आने पर उसका निराकरण करने के पूर्व ही हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और हम प्रयास किये बिना ही हार मान लेते हैं। कई बार हम एक-दो प्रयास में असफलता मिलने पर आगे प्रयास करना छोड़ देते हैं । जबकि हो सकता है कि कुछ प्रयास और करने पर कार्य पूर्ण हो जाता या समस्या का समाधान हो जाता । यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है, तो बार-बार असफ़ल होने पर भी तब तक प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिये, जब तक सफ़लता नहीं मिल जाती । क्या पता, जिस प्रयास को करने के पूर्व हम हाथ खींच ले, वही हमारा अंतिम प्रयास हो और उसमें हमें कामयाबी प्राप्त हो जाये, इसलिए आप अपने आप पे भरोषा बनाये रखे और लोग क्या कहेंगे इस बारे में नहीं सोचते हुए धैर्य से कार्य करें । 

अंशु द्वारा बनाई गयी कुछ पेंटिंग्स

           
 

_____________________________________________________________________________________________________

Cresta WhatsApp Chat
Send via WhatsApp
error: Content is protected !!