स्नेहा प्रकाश : लेखक, शिक्षक, पुस्तक समीक्षक, स्तंभकार, साहित्यिक आलोचक, नारीवादी और प्रेरक वक्ता

कहते की अपने सपने, सोच विचार को कायम रखे दुनिया के आधार पर अपने सपने को मत जलाइए, और अगर आपका रास्ता सही है, आप सही काम कर रहे तो आपको धैर्य के साथ आगे बढ़ना है आपको सफल होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती है | अपने आप को उन लोगो की बिच में रखिए जो आपसे बेहतर है, आप उनके साथ रहिए जो आपसे बेहतर है ,क्यों की आपसे कमजोर लोग आपको कुछ नहीं दे सकते है| तो आपको उन्ही लोगो से मिलना बाते करना चाहिए जो आपसे ज्यादा जानते है, जो आपसे आगे है| आइये जानते है स्नेहा प्रकाश को जो एक लेखक, शिक्षक, पुस्तक समीक्षक, स्तंभकार, साहित्यिक आलोचक, नारीवादी और प्रेरक वक्ता है ।

स्नेहा बिहार के मधुबनी जिले से आती हैं और उनकी ससुराल दरभंगा जिले में है। स्नेहा एक मध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं और उनकी शुरूवाती पढाई मधुबनी के स्कूल में ही हुई। फिर पटना विश्वविधालय से इंटर तथा पटना विश्वविधालय से ही अंग्रेजी साहित्य में स्नातक फिर इग्नू से अंग्रेजी साहित्य में ही स्नातकोत्तर करने के बाद इनकी शादी हो गई और वह पति के साथ उदयपुर आ गई।  स्नेहा आई. आई. टी. मद्रास से महिला लेखन में डिप्लोमा का भी कोर्स की हुई है और अभी भी इंग्लिश एन्ड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से से PGCTE कर रही है। 

स्नेहा बताती है कि, उदयपुर आकर उन्होंने यूजीसी नेट की तैयारी शुरू की, पर पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें कुछ दिनों के लिए सब छोड़ना पड़ा। आगे स्नेहा बताती है की मेरी सबसे बड़ी असफलता थी जब मैं यूजीसी नेट परीक्षा में असफल हो गयी और मैंने इसे क्वालिफाई करने की सारी उम्मीद खो दी। क्योंकि मैं तब तक दो बच्चों की मां थी और मुझे उन्हें एकल परिवार में संभालना था। लेकिन फिर से अपने पति के समर्थन के साथ मैंने खुद को मजबूत किया और अगले प्रयास में मैं यूजीसी नेट में सफल हुई। स्नेहा आगे बताती है की मेरे बच्चे छोटे थे और मैं चाह कर भी किसी कॉलेज के साथ नहीं जुड़ सकती थी तब मैंने English Literature Desk and English Literature Forum के नाम से दो ऑनलाइन क्लासेस शुरू किया जहाँ मैंने Audio, Video and pdf Notes के द्वारा छात्रों को यूजीसी नेट के लिए तैयारी करवाना शुरू किया। क्योकिं जब मैं यूजीसी नेट के लिए तैयारी कर रही थी तब मुझे मार्गदर्शन और नोट्स की बहुत कमी महसूस हुई थी। स्नेहा अभी छात्रों को अंग्रेजी साहित्य के लिए सहायक प्रोफेसर और जेआरएफ के लिए एनटीए नेट की तैयारी करने में मदद करती हैं। स्नेहा शिक्षकों के लिए संकाय विकास (Faculty Development) कार्यक्रम पर कार्यशाला भी आयोजित करती हैं और छात्रों के लिए Personality Development & Communication Skills पर भी कार्यशाला आयोजित करती हैं। स्नेहा के साथ लगभग अलग-अलग राज्यों और देशों के 4 से 5 हजार लोग जुड़ चुके हैं और रोज नए-नए लोग जुड़ रहे हैं। स्नेहा बिहार के उन सभी छात्रों को आमंत्रित और सहायता करना चाहती हैं जो यूजीसी नेट के लिए तैयारी कर रहे हैं। 

स्नेहा का दूसरा प्लेटफार्म है sneha_scribbles, जो ये अपने सभी साहित्य गतिविधियों के लिए उपयोग करती हैं । ये अपनी Book Review, Article, Criticism, कहानियाँ और कविताएँ यहां पोस्ट करती हैं । पिछले 9-10 महीने में इन्होने करीब 500 से अधिक, National and International Authors के  Books Review किए है। इनकी एक किताब पिछले साल आई थी और एक इस साल आएगी। इसके अलावा अलग-अलग Online News Website पर इनकी लगभग 30 से अधिक Article प्रकाशित हो चुके है।

स्नेहा अपनी ताकत अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और साहित्य के लिए अपने प्यार को मानती है। नया काम शुरू करने से इनको कभी डर नहीं लगता । ये किसी भी नए काम को शुरू करने से पहले दो बार नहीं सोचती । इनकी सबसे बड़ी ताकत इनका परिवार है, विशेष रूप से इनके पति और बच्चे, हर बार जब ये एक नया काम शुरू करती है तो इनके पति इनको प्रोत्साहित करते हैं और इनपे उनका भरोसा, इनको नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए ताकत देता है। इनके बच्चे हालांकि छोटे हैं, पर वह इनके व्यस्त कार्यक्रमको समझते हैं और हर संभव तरीके से इनकी मदद करते हैं। वे कभी इनको काम करते वक्त परेशान नहीं करते। स्नेहा के अनुसार सबसे ज्यादा मुश्किल काम समय प्रबंधन है , लेकिन ये एक समय में एक काम करती है । स्नेहा दिन-प्रतिदिन की योजना बनाती है और इसे पूरा करने की समय सीमा के साथ कोशिश करती है, कभी-कभी इनको दिन में 10 से 12 घंटे काम करना पड़ता है लेकिन यह पूरी तरह से इनके लिए संतोषजनक है। जैसा कि इनका पसंदीदा उद्धरण है, “चाँद के लिए गोली मारो, भले ही आप असफल हों, आप सितारों के बीच उतरेंगे”।

 

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