तुम ना आना…….. प्रिया मिश्रा

इस बार जो गए हो
तुम मुझसे मोहब्बत का ,
फिर से जायज़ा लेने ना आना

तेरी याद में रोते रोते ,
गर मेरी अर्थी उठ जाए
उस दिन मोहब्बत का ,
फिर से वास्ता देने ना आना

तुमसे बिछर के ,
खो चुकी हूँ सुध अपनी ,
मेरे प्यार को फिरसे ,
आज़माने ना आना,

बेतुकी लगने लगी है ,
प्यार की बातें मुझे अब ,
मेरे विश्वास को फिर से हिलाने ना आना ,

तेरे जाने और आने के बीच ,
मैंने सीखा है ज़िंदगी का सबब
इस बार मेरे एहसास को ,
फिर से झुठलाने ना आना

मेरे ज़िंदा जज़्बात को
फिर से दफ़नाने ना आना
तुम ना आना ,हाँ तुम ना आना

और अगर आना तो ,
फिर मेरी साँसों के ठीक बुझने से पहले
आ जाना ,हाँ आ जाना
एक बार मुझे बाहों में भरकर ,
मुझे पूरा कर जाना ,
तुम आ जाना ,हाँ तुम आ जाना

कवयित्री : प्रिया मिश्रा (पूर्णिया)

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