अपनी उम्र में ऐसी पहली बारिश देखी – डॉ. रितेश कुमार

अपनी उम्र में ऐसी पहली बारिश देखी थी।

अपनी उम्र में ऐसी पहली बारिश देखी थी।

डूबा था शहर अपना हर ओर पानी पानी ही देखी थी

कैसे बयान करो दर्द शब्दों में अपना

जिसके खरोच पे भी दिल चिल्ला उठता था

आज उसको भी डूबा देखा था

सजवाए था अलग से अपने कमरे को

और नई बेड भी मंगवाया था

सब डूबा पड़ा था

रात छत पे बिताया था

खाने को कुछ बचा ना था

पानी खूब भरा था पर पीने को पानी ना था

बिजली भी गुल थी

छत पे ही लग रही महफ़िल थी

कुछ लोग आए थे मदद पर

उनसे भी हम दूर थे

सच में बहुत मजबुर थे

आंखे नम थी गला सुख गया था

सारे सपने जैसे एक साथ ही टूट गया था

अपनी हालत पे बस मन ही मन रो रहे थे

कभी खुद को कभी सरकार को बस भला बुरा कह रहे थे।

रिश्ते नाते सबसे अलग हो गए थे

जिंदगी के साथ और जिंदगी के बाद वाले कागजात भी पानी में ही बह गए थे

बस एक ही आस थी

की छूट गई बरसात थी

धूप भी अब खिलने लगा था

राहत सामग्री भी थोड़ा थोड़ा मिलने लगा था

अब लग रहा था बच जाएगी जान

क्यूंकि कम हो रही थी पानी और दिखने लगा था मकान

नहीं देखनी ऐसी बारिश जिसमें डूब जाए सारे सपने और मकान

लाचार हो जाए जनता और बेबस हो जाए सरकार

हम डूब रहे थे और लोगो की सहानभूति पा रहे थे

हम नए स्मार्ट सिटी में कदम रखने जा रहे थे

आधे सूखे और आधे डूबे नजर आ रहे थे

सब कुछ सह के भी मुस्कुरा रहे थे

लेखक : डॉ. रितेश कुमार (पीटी)
निर्देशक – डॉ. रितेश फिजियो केयर, फ्रेजर रोड, पटना

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