निशि सिंह द्वारा समर्पित आज की दुर्गा को — “च‌ल तू अनवरत”

“च‌ल तू अनवरत”

तू शक्ति है तूही है दुर्गा स्वरूपा
तू जो थकेगी तो बड़ा अनर्थ होगा
कभी सोचा सक्षम है कौन
तेरे समक्ष जो तेरा स्थान लेगा
च‌ल तू अनवरत अग्निपथ
तुझे ये व्रत लेना होगा

अड़चनो ने पाला तुझे
कठिनाइयों ने है सींचा
आई हैं कितनी भी आँधिंयाँ
कभी धीरज तूने ना है खोया
च‌ल तू अनवरत अग्निपथ
तुझे ये व्रत लेना होगा

सुुख हीं में ना हीं दुख में
किसी क्षण ना है तेरा कवच टूटा
चलती रही तू हरदम
कभी तूने मुड़ के ना है देखा
च‌ल तू अनवरत अग्निपथ
तुझे ये व्रत लेना होगा

सच्चाई का दिया साथ तूने
अपनी बुराइयों को है जीता
मानवता की पौध को
कभी भी करूणा से है सींचा
च‌ल तू अनवरत अग्निपथ
तुझे ये व्रत लेना होगा

छोटा सा कोई काम हो
अगर काम हो भी वो बड़ा
तूने हर छोटे-बड़़े काम को
कभी भी मन से है वरण किया
च‌ल तू अनवरत अग्निपथ
तुझे ये व्रत लेना होगा

कवियत्री : निशि सिंह

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