किसी के ज़ख्म तो किसी के गम का इलाज… लोगों ने बाँट रखा है मुझे दवा की तरह

किसी के ज़ख्म तो किसी के गम का इलाज,

लोगों ने बाँट रखा है मुझे दवा की तरह.

महफ़िल में हँसना मेरा मिज़ाज़ बन गया,

तन्हाई में रोना एक राज़ बन गया,

दिल के दर्द को चेहरे से ज़ाहिर न होने दिया,

यही मेरे जीने का अंदाज़ बन गया।

दर्द की भी अपनी अलग अदा है वो भी सहने वालो पर फ़िदा है

लेखिका : श्रीप्रिया सिंह, दरभंगा

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