न्याय प्रिय शनि और देवगुरु बृहस्पति दोनों हुए वक्री, बनेगे बिगड़े काम

शनि-गुरु के वक्री होने से राजनीति, आध्यात्मिक व न्यायिक क्षेत्र में होगी उथल-पुथल

सूर्यपुत्र शनि तथा देवगुरु बृहस्पति दोनों ने अपनी चाल बदल ली है I ये दोनों अब सीधी से उल्टी चाल चलने लगे है I शनि उल्टी यानि वक्री चाल से नए घर धनु राशि में पहुंच गए हैं I वहीं गुरु वृश्चिक राशि में अपना नया आशियाना बना लिए हैं I शनि-गुरु के वक्री होने से इसका प्रभाव जनमानस के साथ-साथ राजनीति, न्यायिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में उथल-पुथल तथा बड़े बदलाव होने की आशंका हैं I

ज्योतिषी पंडित राकेश झा शास्त्री ने कहा कि न्याय प्रिय शनिदेव पुरे 142 दिनों तक अर्थात 18 सितंबर तक देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में वक्री रहेंगे I शनि का गोचर चन्द्रमा से उपचय भाव यानि 3,6,10,11 भाव में होना उत्तम माना जाता हैं I जिनके कुंडली में शनि उल्टी चाल में या नीच के हो, उनके लिए शनिदेव के वक्री का समय अंतराल अच्छा रहेगा I पिशले मंगलवार से ही शनि वक्री हो गए हैं I पंडित झा ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति पहले से ही वृश्चिक राशि में वक्री हैं I गुरु आगामी 11 अगस्त तक इसी राशि में वक्री रहेंगे I

न्यायिक व आध्यात्मिक क्षेत्र में होंगे अहम बदलाव

कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित झा के अनुसार शनि और बृहस्पति का एक साथ वक्री होने से न्यायिक व आध्यात्मिक क्षेत्र में बड़े बदलाव की आशंका हैं I राजनीतिक उथल-पुथल के भी संकेत मिल रहे हैं I सूर्यपुत्र शनि आम जनमानस और मेहनतकश के कर्क माने जाते हैं I वहीं देवगुरु बृहस्पति शिक्षा, आध्यात्म के सूचक माने गए हैं I इससे कर्क, तुला व कुंभ राशि के जातक को कई तरह का लाभ पहुँचेगा I

शनि के मजबूत होने से मिलता हैं मनचाहा परिणाम

ज्योतिषी झा के मुताबिक जातक के जन्म कुंडली में शनि मजबूत होने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं I शनिदेव की कृपा से वैवाहिक, दांपत्य जीवन तथा प्रेम प्रसंग में लाभ होता हैं I इसके साथ ही जातक को भूमि, भवन, वाहन, अचल संपत्ति आदि का सुख भी मिलता हैं I सूर्यपुत्र की कृपा से आर्थिक संकट से मुक्ति एवं जीवन में तरक्की होती हैं I पंडित झा ने बताया कि इनके आशीर्वाद से जातक के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कष्ट दूर होते हैं I शनि और बृहस्पति दोनों के वक्री होने से जातक के बिगड़े काम भी बनेगे I

ज्योतिषी पंडित राकेश झा शास्त्री

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