भोजपुर भारत प्रांत के बिहार राज्य का एक जिला है। इसका मुख्यालय आरा है। बिहार की राजधानी पटना से चालीस किलोमीटर की दूरी पर बसा भोजपुर जिला ऐतिहासिक महत्व रखता है। भोजपुर जिले के निवासियों का मुख्य व्यवसाय कृषि है।

भोजपुर की सीमा तीन तरफ से नदियों से घिरी है। जिले के उतर में गंगा नदी, पूर्व में सोन इसकी प्राकृतिक सीमा निर्धारित करते हैं। भोजपुर के उत्तर मे सारण और बलिया (उत्तर प्रदेश), दक्षिण मे रोहतास, पूर्व मे पटना एवं पश्चिम मे बक्सर, जहानाबाद एवं अरवल जिला से घिरा है ।

भोजपुर जिला पहले शाहाबाद के अन्तर्गत था जिसको सन् 1972 में बांटकर भोजपुर और रोहतास नामक दो जिले बनाए गए। १९९२ तक बक्सर भी भोजपुर जिले का एक अनुमण्डल था जिसे १९९२ में एक अलग जिला बना दिया गया। वर्तमान समय में भोजपुर जिले में तीन अनुमण्डल हैं- आरा सदर, पीरो और जगदीशपुर। जिले में तेरह प्रखण्ड है।

मुख्यालय आरा भोजपुर का एक प्राचीन नगर है। यहां कई दर्शनीय मंदिर हैं। आरण्य देवी इस शहर की आराध्य देवी हैं। जैन समाज के भी कई प्रसिद्ध मंदिर यहां है। भोजपुर में ही जगदीशपुर है, जहां के बाबू कुंवर सिंह ने पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति में अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया था।

आरा देश के बाकी हिस्सों से रेलमार्ग और सड़क मार्ग से भी जुड़ा है। वीर कुंवर सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय है। कई उच्चस्तरीय कॉलेज और स्कूल जिले की शैक्षणिक पहचान दिलाते हैं। हर प्रसाद दास जैन कॉलेज, महाराजा कॉलेज, सहजानंद ब्रह्मर्षि कॉलेज, जगजीवन कॉलेज, महंत महादेवानंद महिला कॉलेज प्रमुख कॉलेज हैं.

भोजपुर का उदय सन 1972 मे हुआ । इसके पूर्व यह शाहाबाद ज़िला का हिस्सा था । सन 1972 मे शाहाबाद ज़िला दो भागो मे बंट गया – भोजपुर और रोहतास । बक्सर तब भोजपुर का एक सब डिवीजन था । सन 1992 मे भोजपुर पुनः बंटा और बक्सर एक स्वतंत्र ज़िला बन गया । भोजपुर ज़िला के तीन सब डिवीजन हुए – आरा सदर , जगदीशपुर और पीरो । आरा शहर भोजपुर का प्रमुख शहर बन गया और ज़िला का हेड क्वाटर भी है।

भोजपुर के उत्तर मे सारण और बलिया(ऊ. प्र) , दक्षिण मे रोहतास , पूर्व मे पटना एवं पश्चिम मे जहानाबाद एवं अरवल ज़िला से घिरा है ।

ऐतिहासिक दृष्टि से भोजपुर का पुराने शाहबाद ज़िला से अट्टूट् रिश्ता है । भोजपुर का आरा शहर का नाम संस्कृत के अरण्य से लिया गया है जिसका अर्थ है जंगल । इसका तात्पर्य यह है कि आज का आरा पूर्व मे एक घनघोर जंगल था । एक मिथक के अनुसार भगवान राम के गुरु आचार्य विश्वामित्र का आश्रम इसी क्षेत्र मे कही था ।

1961 की जनगणना मे भी भोजपुर के प्राचीनता की चर्चा है जो उस समय पुराने शाहबाद ज़िले का एक हिस्सा था ।

प्राचीन के में शाहाबाद मगध साम्राज्य का हिस्सा था और उसमे पटना तथा गया जिला का भी हिस्सा था. हालाँकि यह अशोक सम्राट के साम्राज्य के अंतर्गत था , जिला के अधिकांश भाग में बुद्ध के स्मारक दीखते हैं जो इंगित करता है कि उस समय अधिकांश भाग बुद्ध से प्रभावित था.

ईसा पूर्व सातवी सदी में विख्यात यात्री ह्वेनसांग शाहाबाद के मो-हो-सोलो में आया था. आज उस जगह की पहचान मसाढ़ गाँव के रूप में की गई है जो आरा बक्सर सड़क पर आरा से 10 किलो मीटर की दूरी पर अवस्थित है.

भोजपुर के इतिहास गुप्ता वंश के दौरान क्या था, इसके बारे में बहुत कुछ ज्ञात नहीं है. आदिवासीयों के हाथ से निकल कर इसकी कमान क्रूर डाकुओ के हाथ आ गई. उस समय के प्रमुख प्रभावी लोग थे – केरो . जिला के अधिकांश भागों पर उन्होंने शासन किया. उसके बाद मालवा के उज्जैन प्रान्त से राजपूत आये . उनके बादशाह उस समय राजा भोज थे. इस जिला का नाम शायद उन्हीं के नाम पर भोजपुर पड़ा है.

भोजपुर के मध्य काल का इतिहास निम्नं वर्णित है :-

आरा मे रहते हुए , अफगानों पर विजय प्राप्त कर बाबर ने 1529 मे बिहार पर अधिकार जमाया. इस घटना के बाद इस क्षेत्र का नाम शाहाबाद पड़ा जिसका शाब्दिक अर्थ है – शाहों का शहर.

उसके बाद अकबर ने शाहाबाद को अपने राज्य मे मिला लिया. हलाकि उसकी पकड़ बहुत मजबूत नहीं रही. अकबर के मंत्री मानसिंह ने जिला के राजस्व वसूली के लिए काफी कोशिशे की. लकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया. जगदीशपुर और भोजपुर के राजा ने मुगलों को पराजीत किया. भोजपुर के राजा ने जहाँगीर के खिलाफ विद्रोह किया. शाहजहाँ एवं उसकी रानी ने उनके उत्तराधिकारी राजा प्रताप एवं उनके दरबारी को मरवा दिया. इसके बाद भोजपुर लगभग शांत रहा पर मुगलों के लिए अंत तक कठिनाई बनी रही.

इसके बाद इस जिला मे 1857 की क्रांति हुई जब कुअंर सिंह ने अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह कर दिया.

भौगोलिक संरचना

प्राकृतिक प्रभाग

आधुनिक भोजपुर मे तीन सब डिविजन है – आरा, जगदीशपुर और पीरो। इसमे कुल 14 प्रखण्ड है जो कुल 237526 हेक्टयेर क्षेत्र मे फैले है । उत्तर मे गंगा नदी और दक्षिण मे पूर्वोत्तर रेल्वे के बीच फैला संपूर्ण भूभाग प्रति वर्ष गंगा के द्वारा लाये गए गाद से अति उपजाऊ है । वास्तव मे यह क्षेत्र संपूर्ण बिहार मे उत्तम गेहु फसल उत्पादन के लिए विख्यात है ।

ज़िला मे नदिया तीन तरफ से प्रवाहित होती है – उत्तर , पूर्व एवं कुछ दक्षिणी सीमा पर । गंगा ज़िला के उत्तरी सीमा से बहती है । उत्तर – पूर्व के नीची क्षेत्र की जमीन गंगा नदी से ही उपजाऊ बनी है । खेर नदी और बनास नदी गंगा मे मिलती है ।

सोन ज़िला की दूसरी प्रमुख नदी है । सोन बिहार मे पलामू (झारखंड), मिर्जापुर(ऊ0प्र0) एवं रोहतास(बिहार) की सीमा से प्रवेश करती है । यह भोजपुर के उत्तरी और पूर्वी सीमा से होकर बहती है और पटना ज़िला के मनेर के पास यह गंगा मे मिल जाती है ।

ज़िला संखियकी के रिपोर्ट के अनुसार – ज़िला मे कुल 1244 गाव है जिसमे से 993 आवासित है और 251 निर्जन है । ज़िला मे कुल 228 पंचायत , 12 राजस्व अंचल , 6 श्हर , 22 पुलिस थाना एवं 5 सब पुलिस थाना है ।

ज़िला मे एक प्रमुख डाकघर है जो आरा शहर मे अवस्थित है। यहाँ 41 सब पोस्ट ऑफिस, 3 विभागीय पोस्ट ऑफिस, 252 अतिरिक्त विभागीय पोस्ट ऑफिस है । कुल लगभग 989 गाँव इन पोस्ट ऑफिस से अक्षदीत है।

मौसम

ज़िला मे मौसम समशीतोषण है । गर्मी की शुरुआत मार्च महीने के लगभग मध्य से शुरू हो जाती है। उस समय पश्चिमी हवा संपूर्ण दिन बहती है। अप्रैल एवं मई माह मे अति गर्मी पड़ती है। समान्यतया मानसून का पदार्पण जून के तीसरे सप्ताह से शुरू हो जाता है और वर्षा सितम्बर के अंत तक या अक्टूबर के प्रारम्भ तक जारी रहती है । जाड़े का समय नवम्बर से शुरू हो जाता है औंर मार्च के प्रारम्भ तक जारी रहता है। जनवरी ज़िला का सबसे ठंडा मौसम है जिसमे तापमान लगभग 10 डिग्री तक गिर जाता है। अप्रैल माह से मानसून आने तक ज़िला मे भयंकर आंधी व तूफान भी आते है।

वर्षापात

वर्षा जून माह से शुरू हो जाती है, तापमान मे गिरावट आ जाती है एवं आर्द्रता बढ़ जाती है। ज़िला मे अधिकतम वर्षा जुलाई व अगस्त माह मे पायी गई है। समान्यतया इस माह मे औसत वर्षा 300 मि मि पायी गई है। पुरवा हवा जून से सितम्बर तक बहती है जिससे वर्षा होती है। अक्तूबर से हवा की दिशा बदल जाती है और पछुआ हवा मई तक बहती है। थोड़ी बहुत वर्षा अक्तूबर माह मे भी हो जाती है पर नवम्बर व दिसम्बर माह प्रायः सूखा सूखा रहता है। कुछ वर्षा शीत ऋतु मे भी जनवरी व फरवरी माह मे होती है ।

सिचाई सुविधा

सोन व गंगा नदी सिचाई के लिए मुख्य नदिया है । सिंचित भूमि का अधिकांशतः भाग इन्ही नदियो द्वारा सींचा जाता है। जमींदारी उन्मूलन के पूर्व जमींदार आहार और पईन का इस्तेमाल करते थे जिससे सिंचाई का भी काम लिया जाता था एवं जल निकासी का भी कार्य लिया जाता था। कुआं भी सिंचाई का अच्छा साधन था।

2001 मे ज़िला प्रशासन द्वारा प्रकाशित सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार 15493 हेक्टर भूमि सोन नदी से सिंचित होती है। 14940 हेक्टर भूमि मध्य सोन नदी से सिंचित होती है। 18379 हेक्टर भूमि छोटी नहरों से सिंचित होती है। 2582 हेक्टर भूमि सरकारी बिजली टूबेवेल से सिंचित होती है। 2099 हेक्टर भूमि डीजल टूबेवेल से सिंचित होती है। व्यकितिगत बिजली टूबेवेल से कुल 8263 हेक्टर भूमि सिंचित होती है। 16999 हेक्टर भूमि व्यकितिगत डीजेल टूबेवेल से सिंचित होती है। 58586 हेक्टर भूमि अन्य साधनो द्वारा जैसे आहार, कुआं , तालाब , इत्यादि से सिंचित होती है। अर्थात कुल 237526 हेक्टर भूमि मे 177341 हेक्टर भूमि सिंचित है। इसका मतलब ज़िला मे कुल भूमि का 74.66% सिंचित है।

भूमि इस्तेमाल की रूपरेखा

इस ज़िला मे छोटी पहाड़ियो को छोड़ दे तो सिंचित और असिंचित सभी क्षेत्र मे खेती के लिए बर्बाद की जा रही है। यहाँ तक कि कुछ छोटे तालाब और झील भी , जो कि बतख पालन उपयुक्त थे, पानी सूखा कर बोरो की फसल उपजाई जा रही है। एक खेती की नई विधा ने जन्म लिया जिसे पैकेज प्रोग्राम कहते है । इस पैकेज प्रोग्राम से अंधाधुंध खेती की जा रही है। प्रखण्ड विकास अथॉरिटी भी अच्छी आउटपुट के लिए खेती को बढ़ावा दे रहे है । सोन नहर सिस्टम को और विकसित किया जा रहा है ताकि अतिरिक्त भूमि को खेती के अंतर्गत लाया जा सके ।

2001 मे ज़िला प्रशासन द्वारा प्रकाशित सांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार इस ज़िला मे विभिन्न प्रकार के फसल उगाए जाते है । धान – 105155 हेक्टर मे, गेहु – 67259 हेक्टर मे, मक्का _ 2779 हेक्टर मे, जौ – 1154 हेक्टर मे, चना – 5.017 हेक्टर मे, मटर – 2016 हेक्टर मे, रहर – 919 हेक्टर मे, मसूर – 8115 हेक्टर मे, खेसारी – 8989 हेक्टर मे, सरसों – 2886 हेक्टर मे, मसाले – 31 हेक्टर मे, सब्जी – 5119 हेक्टर मे, फल – 2651 हेक्टर मे, और ईख – 209 हेक्टर मे उगाये जाते है ।

इस रिपोर्ट मे उपज की दर भी प्रकाशित की गई है जो ज़िला प्रशासन को राज्य सरकार से उपलब्ध कराई गई है। इसके अनुसार विभिन्न फसलों के उपज की दर निम्न प्रकार है :-

धान(सबसे अधिक उपज वाला फसल) – 3502 कि0ग्र0/ हेक्टर, धान(स्थानीय सिंचन मे) – 3330 कि0ग्र0/ हेक्टर, गेहु (सिंचित क्षेत्र) – 2725 कि0ग्र0/ हेक्टर, गेहु (असिंचित क्षेत्र) – 2707 कि0ग्र0/ हेक्टर, मसूर – 1047 कि0ग्र0/ हेक्टर, खेसारी – 986 कि0ग्र0/ हेक्टर, सरसों – 679 कि0ग्र0/ हेक्टर, चना – 937 कि0ग्र0/ हेक्टर ।

औद्योगिकीकरण

शाहाबाद के विखंडन के बाद जब भोजपुर और रोहतास का निर्माण हुआ तो अधिकतम बड़े उद्योग रोहतास मे चले गए। बस कुछ छोटे उद्योग और कृषि आधारित कुछ उद्योग भोजपुर मे रह गए ।

ज़िला सांख्यकी रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 1992 और अगस्त 2000 मे 1085 लघु एवं गृह उद्योग जिला उद्योग केंद्र के अंतर्गत रजिस्टर्ड हुए . कुल मिलाकर 869.19 लाख रुपए इन उद्योगों मे लगे और कुल 1858 लोगों को इन उद्यगों मे रोजगार मिला. कोइलवर प्रखंड के अंतर्गत गिद्धा मे एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया है जो 30-40 एकड़ मे फैला है और यह पटना औद्योगिक विकास प्राधिकार के अंतर्गत रजिस्टर्ड है . इंडेन गैस एजेंसी का एक बॉटलिंग प्लांट भी इसी क्षेत्र मे है. किसी भी उद्योग का विकास वहां के बिजली की अनवरत सप्प्लाई पर निर्भर करता है, लेकिन इस जिला मे जरुरत से बहुत कम बिजली की सप्प्लाई होती है. जिला के औद्योगिकीकरण मे यह एक बहुत बड़ी बाधा है.

खान और खनिज

खदान और खनिज भोजपुर जिला मे बहुत कम है. केवल एक ही खनिज इस जिला मे पाया जाता है, वह है सोन नदी का बालू . भोजपुर जिला मे सोन का विस्तार पूर्व से दक्षिण तक लगभग 40 किलोमीटर के विस्तार मे है. लेकिन केवल कोइलवर से ही लगभग 5 किलोमीटर क्षेत्र मे से बालू का उठाव होता है. लगभग 35 किलोमीटर क्षेत्र बालू उठाव के लिए विकसित नहीं किया गया है.

रुचि के स्थान

भोजपुर जिले में जाने के लिए कुछ बेहतरीन स्थानों का उल्लेख नीचे दिया गया है:

  1. सूर्य मंदिर , तरारी : तरारी का सूर्य मंदिर में अन्य देवी देवतओं के साथ सूर्य भगवान का मंदिर है . यह मंदिर चौदहवी शताब्दी या उससे पूर्व का बताया जाता है ।
  2. वीर कुंवर सिंह किला, जगदीशपुर : यह वीर योद्धा १८५७ में जगदीशपुर के युद्ध का महानायक रहा है . उसका किला आज भी उसी शान से खड़ा है और उस महान योद्धा कि याद दिलाता है जिसने आजादी के लिए जीवन के अंतिम क्षण तक को कुर्बान कर दिया ।
  3. महाराजा कॉलेज, आरा : वर्तमान महाराजा कॉलेज एक बहुत ही प्रमुख एतिहासिक स्थल रहा है. यहाँ एक गुफा दिखती है जिसके बारे में बताया जाता है कि यह गुफा जगदीशपुर के किला से जुडी हुई है ।
  4. शाहजी मस्जिद : यह एक पांच गुम्बदों वाला मस्जिद है. यह इस ढंग का भारत में दूसरा मस्जिद है . इसे शाहजहाँ ने सन १६२३ में बनवाया था. यह अरण्य देवी मंदिर के बगल में अवस्थित है ।
  5. मौलाबाग का करबला मस्जिद : सन १८१७ में बना यह मस्जिद औरंगजेब के निर्देश में बना बताया जाता है. यह आरा शहर के मौलाबाग में अवस्थित है ।
  6. अरण्य देवी मंदिर : यह मंदिर बहुत ही प्रसिद्द मंदिर है. आरा शहर की यह देवी मानी जाती है. यहाँ एक प्रतिमा आदि शक्ति की भी है. इसे पांड्वो द्वारा सृजित बताया जाता है. यह बहुत ही पुराना मंदिर है. प्रति दिन अनेक स्राधालू यहाँ आते है ।
  7. चतुर्भुज नारायण मंदिर : लक्ष्मी नारायण का यह एक बहुत ही प्राचीन मंदिर है जो पिरो अंचल के चतुर्भुज ग्राम में अवस्थित है ।
  8. भवानी मंदिर : यह मंदिर चतुर्भुज बरवान में अवस्थित है एवम तेरहवी सदी का बताया जाता है ।
  9. जगदम्बा मंदिर : चरपोखरी अंचल के मुकुंदपुर ग्राम में अवस्थित यह मंदिर देवी जगदम्बा का प्राचीन मंदिर है ।
  10. पार्श्वनाथ मंदिर : मसाढ़ ग्राम में अवस्थित ये एक प्रसिद्द जैन मंदिर है ।
  11. महामाया मंदिर : यह मंदिर सहार अंचल के एकवारी ग्राम में अवस्थित है. यह मुग़ल सामराज्य के बना बताया जाता है ।
  12. जैन सिद्धांत भवन : जैन धर्म से सम्बंधित यह एक महान पुस्तकालय है. यहाँ प्राचीनतम जैन धर्म संबधित हस्त लिखित पांडुलिपिया देखी जा सकती है ।
  13. पयहारी जी का आश्रम : यह सहर अंचल धरमपुर ग्राम में अवस्थित पयहारी बाबा के नाम पर प्रसिद्द स्थल है ।
  14. कुर्वा शिव : शाहपुर में बिलौती रोड पर यह मंदिर अवस्थित है. यह बाणासुर से संबधित बताया जाता है ।
  15. वेंकटेश मंदिर : पेरहाप ग्राम में अवस्थित यह मंदिर दक्षिण शैली का अनोखा मंदिर है ।
  16. शाहजी जमा मस्जिद : इस मस्जिद का निर्माण शेरशाह के द्वारा करवाया गया था जो गरहनी बाज़ार में अवस्थित है ।
  17. लकर शाह की मजार : यह शाहपुर में एक बहुत ही प्रसिद्द मुस्लिम संत के नाम पर बना मजार है ।

source : wikipedia.org / bhojpur.nic.in 

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