रिपोर्ट – शैलेश कुमार तिवारी

गोपालगंज। कटेया प्रखंड के अमेया स्थित हिरमती रानी के दरबार में भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। शारदीय नवरात्र में यहां दूर दराज के इलाकों से आने वाले भक्तों का तांता लगा हुआ है। महाभारत काल से जुड़े इस मंदिर में स्थापित मूर्ति के संबंध में पुजारी बताते हैं कि इस मंदिर में सती की सिर कटी मूर्ति के साथ ही भगवान परशुराम व सहस्त्रा अर्जुन के घोड़ा की मूर्ति एक साथ लगी है। पुजारी ने बताया कि भगवान परशुराम के पिता जदग्नी ऋषि के छह पुत्र थे। सबसे छोटे पुत्र परशुराम थे, वे विद्या अध्ययन के लिए शिव लोक गये हुए थे। उसी दौरान ऋषि के घर राजा सहस्त्रार्जुन पहुंचे। ऋषि के पास अतिथ्य सत्कार के लिए कुछ नहीं था। उन्होंने कामधेनू गाय को राजा के लिए सामग्री लाने को कहा। इस गाय को पूर्व से वरदान प्राप्त था, वह कुछ देर बाद ब्रम्ह लोक से आतिथ्य सत्कार की सभी चीजें लेकर आयी। यह देख राजा ने कहा कि यह गाय तो राजा के पास होनी चाहिए। लेकिन ऋषि ने गाय देने से इंकार कर दिया। इस पर राजा एवं ऋषि के बीच युद्ध हुआ। उसी में राजा ने परशुराम की मां रेणुका व उनके पिता का सिर काट दिया। यह सूचना जब परशुराम को मिली तो उन्होंने वहां पहुंचकर सहत्रार्जुन का वध किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि जमदग्नि ऋषि की तपोभूमि थी और यह सती भगवान परशुराम की मां रेणुका है, जो बाद में चलकर हीरमती रानी के नाम से प्रसिद्ध हुई। इस मूर्ति को 1997 में चोरों ने चोरी कर ली थी। लेकिन तीन वर्ष बाद पुन: यह मूर्ति बरामद हुई व चोरी करने में शामिल लोगों को काफी नुकसान हुआ। बिहार पर्यटन विभाग द्वारा यहां भवन एवं शौचालय का निर्माण कराया गया है।

अमेयां गाँव में सती हिरमती रानी के नाम से यह प्राचीनकालीन मंदिर जाना जाता है यह एक अद्भुत मंदिर हैं यह मंदिर भगवान बुद्ध के समय से है। यह प्राचीनतम मंदिर भव्य शोभायमान हैं यहां पर हमेशा हजारों भक्तों की भीड़ रहती है। लोगों का आना जाना हमेशा बना रहता है।

आपको बता दें यहाँ के पुजारी से जानकारी प्राप्त हुई कि प्राचीनकालीन मंदिर की कुछ खास विशेषताएं हैं यह मूर्ति जो सती हिरमती रानी का है यह प्राचीनकालीन मूर्ति है यह अष्ट धातु की है। इस मूर्ति को दो बार अज्ञात चोरों के द्वारा चुराया गया है लेकिन सती हिरमती रानी की कृपा होने से दोनों बार मूर्ति आसानी से अपने जगह पर आ गयी । पुजारी के द्वारा बताया गया कि जब भी कोई भक्त सच्चे हृदय से , सच्चे भाव से कुछ मांगता है तो उसकी मनोकामना पूरी होती है। यहां पर हमेशा हर समय भक्त आते जाते रहते हैं यह प्राचीनकालीन मंदिर अभी प्रशासन की नज़र से दूर है। यहां आने जाने वाले भक्तों के लिए कोई ठोस और उचित व्यवस्था नहीं है यहां के पुजारी ने बताया कि गोपालगंज के सांसद और सभी विधायक लोगों से निवेदित करने के बाद भी किसी का ध्यान केंद्रित नहीं हुआ उन्होंने बताया कि बॉन्ड्री करने के लिए बहुत बार निवेदन किया गया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया ।

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