1960 के दशक में, भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने बॉलीवुड अभिनेता नाजीर हुसैन से मुलाकात की और उन्होंने भोजपुरी में एक फिल्म बनाने के लिए कहा, जिसकी वजह से 1963 में पहली भोजपुरी फिल्म रिलीज हुई। भोजपुरी सिनेमा का इतिहास अच्छी तरह से प्राप्त फिल्म “गंगा मैया तोहे पीयरी चढ़ाईबो” के साथ शुरू होता है, जिसे निर्नाल पिक्चर्स के बैनर के तहत बिसननाथ प्रसाद शाहाबादी द्वारा निर्मित किया गया था और कुंदन कुमार द्वारा निर्देशित किया गया था। निम्नलिखित दशकों के दौरान, फिल्मों को फिट बैठता है और शुरू में उत्पादन किया गया।

“गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबों” सन् 1963 में रिलीज हुई पहली भोजपुरी फिल्म थी, जिसके डाइरेक्टर कुंदन कुमार और प्रोड्यूसर बिश्वनाथ प्रसाद शाहाबादी थे । यह भोजपुरी भाषा में बनने वाली सबसे पहली फिल्म थी, इसमें कुमकुम, अशीम कुमार और नाज़िर हुसैन प्रमुख कलाकार थे । फिल्म में संगीत चित्रगुप्त का था और गीत लिखे थे शैलेंद्र ने । इस फिल्म के गानों को लता मंगेशकर, ऊषा मंगेशकर, सुमन कल्याणपुर और मोहम्मद रफ़ी जैसे गायकों ने अपनी आवाज दी थी |

फिल्म 22 फरवरी 1963 को, पटना के वीणा सिनेमा में रिलीज हुई थी । फिल्म के डाइरेक्ट कुंदन कुमार थे और प्रोड्यूसर बिश्वनाथ प्रसाद शाहाबादी थे जो भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के जान-पहचान के थे । फिल्म की सुरुआती बजट ₹1,50,000 था जो अंत तक पहुँचते-पहुँचते ₹5,00,000 हो गया था । राजेंद्र प्रसाद को यह फिल्म रिलीज से पहले एक विशेष स्क्रीनिंग में पटना के सदाक़त आश्रम में दिखाया गया था । फिल्म की कहानी विधवा-विवाह पर आधारित था | फिल्म के प्रमुख कलाकार कुमकुम, जगन्नाथ शुक्ल (जग्गी बाबा), अशीम कुमार (श्याम), नाज़िर हुसैन (रमायन तिवारी), हेलेन, पद्मा खन्ना, सुजीत कुमार, लीला मिश्रा, टुन टुन, भगवान सिन्हा थे |

फिल्म का मुहूर्त शॉट, पटना के शहीद स्मारक पर 16 फरवरी 1961 को फिल्माया गया | फिल्म का ज्यादातर हिस्सा पटना से करीबन 35 किलोमीटर के दूरी पर मौजूद बिहटा गाँव में हुआ था । कुछ हिस्सा पटना के गोल घर और आरा रेलवे स्टेशन पर फिल्माया गया था | 27 अप्रैल 1965 को आनंद बाजार पत्रिका भवन, कलकत्ता में पहला भोजपुरी फिलिम अवार्ड के आयोजन हुआ था । इस अवार्ड समारोह में गंगा मइया तोहें पियरी चढ़इबों को बहुत सारे अवार्ड मिले जिसमे बेस्ट फिल्म , बेस्ट ऐक्ट्रेस (कुमकुम), बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (नाज़िर हुसैन), बेस्ट गीतकार (शैलेंद्र) और बेस्ट गायक कलाकार (मोहम्मद रफ़ी – “सोनवाँ के पिंजरा में”) के लिए मिला था |

 

Source : wikipedia.org

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