डॉ सुष्मिता से जानें मखाना खाने के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

मखाना खाने के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

व्रत के दिनों में ज्‍यादातर लोगों द्वारा मखाने का सेवन किया जाता है। मखाना पोषक तत्वों से भरपूर एक जलीय उत्पाद है। मखाना स्‍वास्‍थ्‍य के लिये भी काफी फायदेमंद है। मखाने के बीज किडनी और हृदय के लिये लाभप्रद हैं।

1. इसमें ढेर सारा एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जिससे झुर्रियों का असर कम हो जाता है।

2. इससे ब्लड प्रेशर पर भी निंयत्रण पाया जा सकता है। यह शरीर के अंग सुन्‍न होने से बचाता है तथा घुटनों और कमर में दर्द पैदा होने से रोकता है।

3. प्रेगनेंट महिलाओं और प्रेगनेंसी के बाद कमजोरी महसूस करने वाली महिलाओं को मखाना खाना चाहिये।

4. मखानों का सेवन करने से शरीर के किसी भी अंग में हो रही दर्द से राहत मिलती है। कमर दर्द और घुटने में हो रही दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।

5. मखानों को देसी घी में भूनकर खाने से दस्त जैसे रोग से छुटकारा पाया जा सकता है।

6. मखानों का सेवन करने से शरीर में हो रही जलन से भी राहत मिलती है।

7. मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है।

8. मखानों को दूध में मिलाकर खाने से दाह (जलन) में आराम मिलता है ।

9.  मखानों के सेवन से दुर्बलता मिटती है तथा शरीर पुष्ट होता है।

10. मखाने में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम होता है। मैग्नीशियम रक्त, ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों के प्रवाह को बेहतर बनाता है। मैग्नीशियम और फोलेट की पोषण संबंधी सामग्री कोरोनरी हृदय रोगों और अन्य हृदय संबंधी स्थितियों से जुड़े जोखिम को कम करती है।

11. उच्च पोटेशियम और कम सोडियम के कारण मखाने उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति के लिए अच्छा है। जो ब्लड प्रेसर को कम करता है और उच्चरक्तचाप से राहत दिलाता है।

12. इसमें उच्च फाइबर और कम वसा है। यह शरीर में वसा में कमी लातें हैं |

13. इसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है और ग्लूटेन मुक्त होता है इसलिए यह नियमित व्यायाम करने के लिए एक उत्कृष्ट नाश्ता है।

14. डायबिटीज चयापचय विकार है, जो उच्च रक्त शर्करा के स्तर के साथ होता है। मखाना कहने के लाभ में ब्लड प्रेशर के रोगी को आराम मिलता है. मखाना मधुमेह के रोगी के लिए एक उत्तम नाश्ता है। यह उनके लिए पौष्टिक तो है ही किंतु साथ ही में यह उनके रक्त शर्करा स्तर (blood sugar level) को भी नियंत्रण में रखता है। 

15. मखाने के सेवन से तनाव कम होता है और नींद अच्छी आती है। रात में सोते समय दूध के साथ मखाने का सेवन करने से नींद न आने की समस्या दूर हो जाती है। 

16. मख़ानो की नियमित खपत धीरे-धीरे आपके मसूड़ों की समस्याओं को ठीक करती है। यह मुंह में दर्द को ठीक करने में भी मदद करता है।

17. मखाना का नियमित सेवन आपके ब्लड सेर्कुलेसन को सही बनाने में मदद करता है यह शरीर में रक्त नियमन में सुधार के द्वारा किडनी की समस्या के जोखिम को कम करने में भी मदद करता है। 

यह जीर्ण अतिसार, ल्यूकोरिया, शुक्राणुओ की कमी आदि में उपयोगी है। इसमें एन्टी-ऑक्सीडेंट होने से यह श्वसन तंत्र, मूत्र-जननतंत्र में लाभप्रद है। यह ब्लड प्रेशर एवं कमर तथा घुटनों के दर्द को नियंत्रित करता है। इसके बीजों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, वसा, कैल्शियम एवं फास्फोरस के अतिरिक्त केरोटीन, लोह, निकोटिनिक अम्ल एवं विटामिन बी-1 भी पाया जाता है ।मखाने के फायदे से डायबिटीज, किडनी, पाचन, मर्दाना कमजोरी, प्रजनन क्षमता सहित अनेक रोगों में चमत्कारिक लाभ होता है |

मखाना, जिसे फॉक्स-नट Fox nut (Lotus Seeds) या कमल का बीज भी कहा जाता है, ईरियल फॉक्स नामक पौधे से आता है जो तालाबों के स्थिर पानी में उगता है। मखाने देखने में तो गोल मटोल सूखे दिखाई देते है पर मखाने के फायदे कई औषधीय गुणों से भरपूर होते है । हमारे स्वास्थ्य को तंदरूस्त रखने में मदद करते है। भारत में यह नवरात्रों और अन्य अवसरों के दौरान तैयार किए जाने वाला एक लोकप्रिय ‘उपवास’ पकवान है। अधिकांशतः ताकत के लिए दवाये मखाने से बनायी जाती हैं। केवल मखाना दवा के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता, इसलिए इसे सहयोगी आयुर्वेदिक औषधि भी कहते हैं। तालाब, झील, दलदली क्षेत्र के शांत पानी में उगने वाला मखाना पोषक तत्वों से भरपुर एक जलीय उत्पाद है। मखाने के बीज को भूनकर इसका उपयोग मिठाई, नमकीन, खीर आदि बनाने में होता है। मखाने में 9.7% आसानी से पचनेवाला प्रोटीन, 76% कार्बोहाईड्रेट, 12.8% नमी, 0.1% वसा, 0.5% खनिज लवण, 0.9% फॉस्फोरस एवं प्रति १०० ग्राम 1.4 मिलीग्राम लौह पदार्थ मौजूद होता है। इसमें औषधीय गुण भी होता है। बिहार के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, सीतामढ़ी, पूर्णिया, कटिहार आदि जिलों में मखाना का सार्वाधिक उत्पादन होता है। मखाना के कुल उत्पादन का 88% बिहार में होता है। 28 फ़रवरी 2002 को दरभंगा के निकट बासुदेवपुर में राष्ट्रीय मखाना शोध केंद्र की स्थापना की गयी। दरभंगा में स्थित यह अनुसंधान केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्य करता है। दलदली क्षेत्र में उगनेवाला यह पोषक भोज्य उत्पाद के विकाश एवं अनुसंधान की प्रबल संभावनाएँ है।

लेखिका : डॉ सुष्मिता सिंह,
एमबीबीएस, एमएस, फेलोशिप
(स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ – अपोलो क्रैडल अस्पताल, पुणे)
गृह जिला – दरभंगा, बिहार

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