Mandar Parvat, also known as Mandar Hill is a small mountain situated in Banka district under Bhagalpur division of state of Bihar. It is about 700 ft high and approximately 45 km south of Bhagalpur city off Bausi, a place located on the state highway between Bhagalpur and Dumka. Mandar Hill is a great place of pilgrimage although it is not so well known now. On top of the hill are a Hindu and a Jain temple.

The mountain has many references in hindu mythology known as mandarachal parvat. As per references found from Puranas and Mahabharata this hill was used for churning the ocean to extract the nectar from its bosom (Samudra Manthan).

There is, adjacent to this hill, a pond called “Paapharni”. This holy pond has its own historical significance. It is a place where you can revive yourself after taking a bath in the pond that refreshes mentally and physically. In the middle of the pond is a temple of lord Vishnu and goddess Laxmi.

Many rare sculptures of Lord Shiva, Kamdhenu and Varaah, believed to be of 11-12th century AD, can be found to be scattered around Mandar Hill. These rare artifacts need to be conserved by Archaeological Survey of India.

Source : Wikipedia.org

1 thought on “Place of Interest in Banka : Mandar Parvat

  1. अति-संक्षिप्त विवरण दिया आपने मंदार के बारे में। मंदार के नीचे एक प्राचीन नगर हुआ करता था जिसे वालिशा नगर कहते थे जिसके साक्ष्य आज भी ज़मीन के नीचे मिलते हैं। इस नगर के विशाल मंदिरों-गोपुरमों के पत्थर अभी भी ज़मीन पर पड़े हुए हैं मगर इसका अधिकतम हिस्सा अज्ञानतावश लोग उठाकर ले गए। यहाँ से ऐसे नक्काशीयुक्त पत्थर 100 किलोमीटर की परिधि तक लोग ले गए। इन्हीं पत्थरों से बना देवघर का बैद्यनाथ मंदिर भी है जिसका प्रमाण वहाँ लगे राजा आदित्यसेन का एक शिलालेख और पत्थरों की प्रकृति भी है।
    यहाँ दक्षिण के राजराजा राजेन्द्र चोल का बनवाया हुआ पत्थर का एक भवन भी है। जिसकी कलकारी ही बताती है कि यह भवन निर्माण शैली दक्षिण भारत की है।
    मंदार के ऊपर सीता कुंड है यह पौराणिक गाथाओं का प्रमाण है। यहीं पास में पर्वत की शीला में खुदा हुआ एक विशाल सिर है जिसकी ऊंचाई 42 फीट है। शेरविल ने इसे ‘मिश्र की शैली’ का बताया है।
    यहीं पास में नरसिंह गुफा है जिसमें भगवान नरसिंह की मूर्ति उत्कीर्ण है। इस गुफा में समुद्रगुप्त के समय का एक शिलालेख है।
    इस पर्वत पर कई लिपियों में लगभग दर्जन भर शिलालेख हैं।
    यहाँ पापहरिणी सरोवर के ऊपर बिहार का सबसे बड़ा शिलालेख है। यह अभिलेख 18×4 फीट का है। इसकी चर्चा विलियम फ्रेंकलिन ने ‘इन्क्वायरी कंसर्निंग द साइट ऑफ एन्सिएंट पालिबोथरा’ ने भी की है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संस्थापक कनिंघम ने भी मंदार के शिलालेखों के बारे में लिखा है। लगभग एक दर्जन से अधिक इतिहासपसंद अंग्रेज़ यहाँ आए और उन्होंने मंदार के बारे में लिखा।
    दुख इस बात का है कि स्वयं प्रशासन ही विकास का हवाला देकर इसके ऐतिहासिक अमूल्य तथ्यों से जान-बूझकर छेड़छाड़ कर रहे हैं। कई शिलालेख बराबर नष्ट किए जा रहे हैं। किसी भी स्तर पर की गई शिकायत का कोई असर नहीं होता। पुरातत्व, कला व संस्कृति विभाग (बिहार सरकार), ए एस आई जैसी संस्थाएं मंदार के नाम पर कोई कार्रवाई नहीं करती। जैनियों ने भी पुरातात्विक महत्व के भरपूर साक्ष्य नष्ट कर दिये। जैन धर्म के लोग यहाँ अतिक्रमण में माहिर हैं। इनके विरुद्ध की गई शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लेता।

    उपरोक्त तथ्यों का ज़िक्र किया जाना भी चाहिए जिससे जनमानस को सही जानकारी प्राप्त हो।

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