मंजूषा को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान : समारोहपूर्वक प्रारंभ हुआ 7-दिवसीय मंजूषा महोत्सव

भागलपुर |  5 फरवरी, 2019 को भागलपुर के ऐतिहासिक सैंडिस कम्पाऊंड में उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के संयोजन में बिहार सरकार के उद्योग विभाग एवं भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सात दिवसीय मंजूषा महोत्सव का उद्घाटन जिला पदाधिकारी प्रणव कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मंजूषा कला के शिल्प एवं सौंदर्य के विविध आयामों पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। महोत्सव में जहाँ लगाये गये हैं, मंजूषा सहित विभिन्न शिल्पों के 50 स्टॉलों लगाये गये हैं, वहीं मंजूषा के 100 कलाकार लाईव डेमोंसट्रेसन कर रहे हैं। महोत्सव के दौरान प्रति दिन संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।

महोत्सव का उद्घाटन करते हुए जिला पदाधिकारी प्रणव कुमार ने कहा कि कला किसी भी देश की पहचान होती है। हम अपनी सभ्यता और सांस्कृति से जुड़कर ही विकास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो बारीकी और सुंदरती हस्तनिर्मित वस्तुओं में होती है उसका मुकाबला मशीन निर्मित कलाकृति नहीं कर सकती। कहा कि मंजूषा अंगभूमि की बिहुला-विषहरी की लोकगाथा से जुड़ा है और इसकी खासियत यह है कि इसकी पृष्टभूमि में नारी सशक्तिकरण का संदेश है। तेजी से प्रगति की ओर अग्रसर मंजूषा को राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भूमिका के लिये उन्होंने कलाकारों को बधाई दी। कहा कि सरकार व जिला प्रशासन मंजूषा के विकास हेतु हर संभव मदद करेगी।

उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के उप निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने कहा कि किसी भी लोककला को अंतराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिये जीआई रजिस्ट्रेसन जरूरी है और मंजूषा को मार्च माह तक जीआई रजिस्ट्रेसन मिल जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि आईडीपीएच प्रेग्राम के तहत 30 करोड़ों की लागत से बिहार की 11 लोककलाओं को विकसित करने हेतु राज्य में 15 कलक्टर बनाये जा रहे हैं जिसमें भागलपुर की मंजूषा भी शामिल है। बताया कि आज मंजूषा के साथ 5000 कलाकार जुड़े हुए हैं जिनके लिये एक करोड़ की लागत से कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जायेगा जिसपर अगले माह से काम शुरू हो जायेगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेयर सीमा साह ने कहा कि पहले भागलपुर की पहचान ‘सिल्क सिटी’, कतरनी चावल और जर्दालू आम से थी, पर आज मंजूषा भी उसकी पहचान बन गयी है। शिक्षाविद् राजीव कांत मिश्र ने कहा कि कोई भी कला तभी उन्नत होती है जब उसके कलाकारों को सम्मान के साथ आर्थिक सपोर्ट भी मिले।

प्रारम्भ में गुरू मंजूषा मनोज पंडित ने आगत अतिथियों का स्वागत किया, वहीं पूर्व जिला उद्योग महाप्रबंधक ने धन्यवाद ग्यापन किया। इस अवसर पर मनोज मीता, दीपक कोचगवे, डॉ अमरेन्द्र, कवि राजकुमार, शिव शंकर सिंह पारिजात, जगतराम साह कर्णपुरी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी श्री राय एवं गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में मंजूषा कलाप्रेमी उपस्थित थे।

 

रिपोर्ट – शिव शंकर सिंह पारिजात (इतिहासकार),
अव. उप जनसम्पर्क निदेशक, भागलपुर

 

1 thought on “मंजूषा को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान : समारोहपूर्वक प्रारंभ हुआ 7-दिवसीय मंजूषा महोत्सव

  1. सुन्दर आलेख। समय की मांग, समाप्त होती लोक संस्कृति को जीवित रखने का अलख प्रयास

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