पीरामल फाउंडेशन और यूनिसेफ के सहयोग से बिहार के बच्चों और महिलाओं के विकास के लिए धर्मगुरूओं की संगोष्ठी का आयोजन

“माँ और बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और सुपोषित रखना सबसे बड़ा धर्म”

बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन के तत्वावधान में पीरामल फाउंडेशन और यूनिसेफ के सहयोग से बिहार के बच्चों और महिलाओं के विकास के लिए धर्मगुरूओं की संगोष्ठी का आयोजन

पटना | 5 फरवरी 2019 – बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन, पीरामल फाउंडेशन ( हेल्थ इनिशिएटिव) और यूनिसेफ के द्वारा संयुक्त रूप से बिहार के बच्चों और महिलाओं के विकास के लिए धर्मगुरूओं की संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्द्याटन आत्म कल्याण केंद्र के आचार्य श्री सुर्दशन जी महाराज, खानकाह मुनिमिया के प्रोफेसर सैयद शमीमुद्दीन अहमद मुनैमी, इदारे शरिया के हाजी एस.एम सन्नाउल्लाह तख्त श्री हरमंदिर जी साहब के सरदार ज्ञानी चरणजीत सिंह, अंबेडकर मिशन के बुद्ध शरण हंस जमाते इस्लामे हिंद के मोहमद शहजाद सेंट एनी कान्वेंट की सिस्टर नैली करकट्टा] यूनिसेफ बिहार के प्रमुख असदुर रहमान] पीरामल फाउंडेशन ( हेल्थ) के प्रबंधक (ऑपरेशन) रूपेश सिंह, विकासार्थ ट्रस्ट की सुनीता सिंह ने 8 जिलों से आए विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सैयद शमीमुद्दीन अहमद मुनैमी ने कहा कि धर्मगुरू आमतौर पर जो भाषण देते है वो धर्म के इतिहास और धार्मिक क्रियाकलापों पर आधारित होता है जबकि जरुरत है हम अपनी प्रवचन, तहरीरों और जुम्मे की नमाज के बाद बच्चों और महिलायों के मुद्दों पर बात करने की । धर्मगुरूओं को बच्चों के लिए काम करने की जरूरत है । कोई धर्म ऐसा नहीं है जिसमें बच्चों के गर्भ में लिंग की जांच करवाने की बात की गई है और यदि कोई करवा रहा है तो वो सबसे बड़ा अधर्म है. बच्चों को मां का पहला दूध देने से किसी धर्म ने मना नहीं किया। धर्मगुरूओं को बच्चों के बेहतरी के लिए अधंविश्वासों और समाज में व्याप्त कुरितीयों के लिए लड़ना होगा। टीकाकरण के बाद कुछ बच्चों के तबियत बिगड़ने जैसी मीडिया में आने वाले खबरों को लेकर उन्होनें कहा 15 बच्चों की तबियत बिगड़ने की बात मीडिया में होती हैं लेकिन 15 लाख बच्चों को उन्ही टीकों के लगने के बाद कुछ नहीं होता तो उसपर कोई बात नहीं करता। इस्लाम में अगर कोई महिला बच्चे को अगर एक बूंद भी दूध पिलाती है तो उसे मां का दर्जा दिया जाता है।

आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज ने कहा कि बच्चे भगवान के सबसे करीब होते है। हम सबको अपने बेटे और बेटियों को बराबरी के साथ सम्मान और प्यार देना होगा। जब यह बच्चों के बारे में है, तो कोई धर्म पूर्वाग्रह या विभाजन नहीं रखता। बच्चे हमारा वर्तमान और भविष्य हैं। सभी धर्मों में बच्चों और उनके स्वास्थ्य को हर चीज से ऊपर रखा गया हैं।

जमाते इस्लामे हिंद के मो शहजाद ने कहा कि सफाई को इस्लाम में आधा ईमान कहा गया है। धर्मगुरू लोगों के साथ समूह में बात करते है उनका लोगों पर काफी प्रभाव होता है। ऐसे में अगर वो टीकाकरण, महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण की बात करें तो लोगों द्वारा सही व्यवहारों को अपनाने में सहयोगी होगा। बिहार में 2 करोड़ मुस्लिम है तो उनतक टीकाकरण पोषण और स्वास्थ की सही बात को पंहुचाने की जिम्मेदारी हम सब धर्मगुरूओं की है।

इदारे शरिया के हाजी एस.एम सन्नाउल्लाह ने कहा कि मां का दूध अमृत समान है। 6 माह तक बच्चों को केवल मां का दूध पिलाया जाना बहुत ही जरूरी है। हम लोग जब पोलियो अभियान के साथ जुड़े थे तो लोगों में पोलियो को लेकर बहुत सी गलत धारणाएं थी। इनसे निपटने के लिए हमने घर घर जाकर बैठकें की. लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया और यह इस तरह के प्रयासों का परिणाम है कि हम पोलियो से निपटने में सफल हुए हैं।

सरदार ज्ञानी चरणजीत सिंह ने कहा कि बिना मां के इस प्रकृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। बच्चा मां के गर्भ में 9 महीने रहता है. बच्चों को स्वस्थ, शिक्षित और सुपोषित करने के लिए हमें मां पर ध्यान देने की जरूरत है. हमें महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा और साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि वो इन सेवाओं का लाभ उठा सकें. यह न केवल एक परिवार के स्वास्थ्य को सुधारेगा बल्कि पुरे देश के स्वास्थ्य में सुधार लायेगा.

बौद्ध धर्म प्रचारक बुद्ध शरण हंस ने कहा कि समाज में दो तरह के लोग है जिनपर सही बात सिखाने की जिम्मेदारी है , एक शिक्षक और दूसरा धर्म गुरु. धर्म गुरु का यह दायित्व है कि वो समाज में सकारात्मक सन्देश दें और लोगों में नैतिक मूल्यों का विकास करें.

यूनिसेफ के बिहार प्रमुख असदुर रहमान ने कहा कि बिहार में 4 करोड़ 70 लाख बच्चे है जो कुल जनसख्या का 46 प्रतिशत है. हर 5 मिनट में एक शिशु की मौत हो जाती है वही बच्चे को जन्म देने के दौरान हर २ घंटे में 1 माँ की मौत हो जाती है. बिहार का हर दूसरा बच्चा कुपोषित है और 80 प्रतिशत किशोर किशोरियां में खून की कमी है. भारत में लगभग 98 प्रतिशत लोग किसी न किसी धर्म को मानते है ऐसे में इन हालातों को बदलने में धर्म/ अध्यात्मिक गुरुओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है.

इस संगोष्ठी के उद्देश्य के बारे में बत्ताते हुए यूनिसेफ कि संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने कहा कि दो दिनों तक चलने वाले इस संगोष्ठी का उद्देश्य बच्चों और महिलाओं की बेहतरी के लिए स्वास्थ्य टीकाकरण और पोषण कार्यक्रमों से जुड़े सकारात्मक संदेशों को समुदाय में साझा करना और समुदाय के बीच स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की मांग को बढ़ाना के लिए विभिन्न धर्म और अध्यात्मिक गुरुओं को प्रेरित करना है.

पीरामल फाउंडेशन (हेल्थ) के एडवाइजरी हेड आश्विन देशमुख ने कहा कि बिहार के 5 आकांक्षी जिलों अररिया, बेगूसराय, कटिहार, शेखपुरा, सीतामढ़ी में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 58 है जबकि जन्म के 1 घंटे के अन्दर केवल 38 प्रतिशत माताएं ही स्तनपान करवा पाती हैं जबकि नियमित टीकाकरण का प्रतिशत 65.58 है. यह आकड़ें समुदाय के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी को दर्शाते है. यह संगोष्ठी, स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े सही व्यवहारों को संवाद और साझेदारी के माध्यम से बढ़ावा देगा जिसका अनुकूल प्रभाव आकांक्षी जिलों के स्वास्थ्य और पोषण के मानकों पर पड़ेगा.

भारत सरकार ने नीति आयोग के साथ मिलकर पूरे देश में आकांक्षी 117 जिलों का चयन किया है जो स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, स्वच्छता के मानकों पर पिछड़े है. इनमें से 25 जिले स्वयं नीति आयोग देख रहा है. पीरामल फाउंडेशन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफॉर्मेशन (ADT) प्रोग्राम के तहत इन 25 जिलों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छ पेय जल और शिक्षा के मानकों को सुधारने के लिए लिए नीति आयोग को सहयोग कर रहा है. इनमे से 5 जिले बेगुसराय, कटिहार, अररिया, शेखपुरा और सीतामढ़ी बिहार के है.

दो दिनों तक चलने वाली इस संगोष्ठी में इनविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट की टीम जिलों से आये हुए सभी धर्म के प्रतिनिधियों को गर्भावस्था के दौरान शीघ्र पंजीकरण और प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव के फायदे, टीकाकरण, शीघ्र स्तनपान, 6 माह तक केवल स्तनपान, किशोरियों की शिक्षा और बाल विवाह की रोकथाम जैसे मुद्दों बात चीत करेंगे और इन विषयों से जुड़े हमारे समुदाय में प्रचलन, चुनौतियाँ एवं सही व्यवहार के बारे में भी चर्चा की जाएगी. इस संगोष्ठी में जिलों से आये धर्म गुरु, अपने जिलों में उचित मंचों की पहचान कर इन संवादों को अपने अपने क्षेत्र में लोगो तक पहुचाएंगे. संगोष्ठी के दूसरे दिन इसके लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी.

संगोष्ठी में पटना, अररिया, बेगूसराय, कटिहार, शेखपुरा, सीतामढ़ी, पूर्णिया, गया और बांका के हिन्दू, मुस्लिम बौद्ध, सिख, आर्ट ऑफ़ लीविग, आंबेडकर मिशन एवं विभिन्न धर्मों के लगभग 80 धर्म गुरुओं ने भाग लिया. इस इस दौरान बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन के बारे में विकसित सन्दर्भ सामग्री का विमोचन किया गया.

 

रिपोर्ट : अविनाश उज्जवल

 

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