मंदार पर्वत की पृष्टभूमि में लगता है बौंसी का मकर संक्रांति मेला

प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर भागलपुर प्रमंडल के बांका जिला के बौंसी में बिहार का सुप्रसिद्ध बौंसी मेला लगता है जिसमें बड़ी-बड़ी संख्या में निकटवर्ती जिलों सहित झारखंड व बंगाल के लोग भाग लेते हैं जिसमें आदिवासियों की भी अच्छी-खासी संख्या रहती है। वर्षों से परम्परागत रूप से लगने वाले बौंसी मेले को राज्य सरकार द्वारा राजकीय मेला घोषित किये जाने से इस बार मेले की रौनक बढ़ गयी है।

बौंसी मेला मंदार पर्वत की तलहटी में लगता है जिसकी पौराणिक महत्ता है। ऐसी मान्यता है कि इसी मंदार को मथनी बनाकर शेषनाग को ‘नेति’ अर्थात रस्सी के रूप में लपेटकर देव और दानवों ने समुद्र मंथन किया था जिससे अमृत, विष, महालक्ष्मी, ऐरावत सहित चौदह रत्न निकले थे। इसी स्थल पर छल से समुद्र मंथन से निकले अमृत का पान करनेवाले मधू असुर का वध करने के कारण जहाँ भगवान विष्णु मंदार मधुसूदन कहलाये, वहीं मंथन से निकले हलाहल विष का पान कर जगत् की रक्षा करनेवाले भगवान शिव नीलकंठ कहलाये। ऐसी मान्यता है कि मंदार मधुसूदन के रूप में भगवान विष्णु सदैव मंदार क्षेत्र में विद्यमान रहते हैं। बौंसी बाजार में भगवान मंदार मधुसूदन का भव्य मंदिर है जहाँ से मकर संक्रांति के दिन उनकी आकर्षक शोभा-यात्रा निकलती है।

मंदार पर्वत की तलहटी में पापहारिणी सरोवर है जिसे पपहरणी पोखर भी कहते हैं। मकर संक्रांति के दिन इसमें स्नान करने का विशेष धार्मिक महात्म्य है। सरोवर के बीच में बड़ा ही आकर्षक लक्ष्मी-नारायण मंदिर है। सरोवर में बोटिंग की सुविधा सैलानियों का मुख्य आकर्षण है। सरोवर के निकट बड़ी संख्या में साफा पेड़ सम्प्रदाय के आदिवासी भी अपनी पारम्परिक रीति से पूजा-पाठ करते हैं। मंदार पर्वत के शिलाखंडों पर उत्कीर्ण प्राचीन मूर्तियां पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। बौंसी मेला में लगने वाले मीनाबाजार में तरह-तरह की दूकाने सजती हैं। मनोरंजन के लिये खेल-तमाशे भी लगते हैं। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और विशाल कृषि प्रदर्शिनी भी लगती है। इस वर्ष मेले का उद्घाटन सूबे के राजस्व मंत्री राम नारायण मंडल द्वारा सम्पन्न हुआ जिन्होंने घोषणा की कि मंदार पर्वत पर निर्माणाधीन रोप-वे शीघ्र ही पर्यटकों के लिये चालू हो जायेगा।

पौराणिक कथा का साक्षी है मंदार पर्वत

बौंसी स्थित भव्य मंदिर में विराजते हैं विष्णु स्वरूप मंदार मधुसूदन

बड़ी संख्या में जुटते हैं मंदार में साफा पेड़ सम्प्रदाय के संताल आदिवासी

बौंसी मेला में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते ताल नृत्य संस्थान, भागलपुर के कलाकार

बौंसी मेले का विहंगम दृश्य

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लेखक : -शिव शंकर सिंह पारिजात (इतिहासकार),
अव. उप जनसम्पर्क निदेशक

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