एनीमिया के कारण, लक्षण, उपचार और रोकथाम जाने डायटीशियन सुषमा सुमन से

पटना की डायटीशियन सुषमा सुमन एनीमिया के कारण, लक्षण, उपचार और रोकथाम के बारे में बता रही है, जो महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों के लिए भी काफी ही लाभदायक है | डायटीशियन सुषमा  बताती है की एनीमिया का अर्थ है, शरीर में खून की कमी होना, यह तब होता है, जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर, इनके निर्माण की दर से अधिक होती है | हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन एक ऐसा तत्त्व है जो शरीर में खून की मात्रा बताता है | महिलाओं में इसकी मात्रा 11  से 14 प्रतिशत के बीच होना चाहिए तथा पुरुषों में इसकी मात्रा 12 से 16 प्रतिशत होनी चाहिए | किशोरावस्था और रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बीच की आयु में एनीमिया सबसे अधिक होता है | भारत में 80 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाए एनीमिया से पीड़ित है | एनीमिया एक गंभीर बीमारी है | इसके कारण महिलाओ को अन्य बीमारियां होने की संभावना और बढ़ जाती है | एनीमिया से पीड़ित महिलाओ की प्रसव के दौरान मृत्यु की संभावना सबसे अधिक होती है |

एनीमिया के लक्षण
डायटीशियन सुषमा के अनुसार अगर आपकी त्वचा का सफ़ेद दिखना, जीभ, नाखुनो एवं पलकों के अंदर सफेदी, कमजोरी एवं बहुत अधिक थकावट, चक्कर आना (विशेषकर लेटकर एवं बैठकर उठने में), बेहोश होना, सांस फूलना, ह्रदयगति का तेज चलना, चेहरे एवं पैरो पर सूजन दिखाई दे तो हो सकता है की आप एनीमिया के शिकार हो |

एनीमिया के कारण
डायटीशियन सुषमा के अनुसार एनीमिया का सबसे प्रमुख कारण लौह-तत्व वाली चीज़ों का उचित मात्रा में सेवन नहीं करना होता है | मलेरिया जैसी बीमारी के बाद शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती है | शौच, उलटी, खांसी के साथ खून का आना | शरीर से खून निकलना (दुर्घटना, चोट, घाव आदि में अधिक खून का बहना) माहवारी में अधिक मात्रा में खून आना, बार-बार गर्भ धारण करना, पेट के अल्सर से खून आना ये सब भी एनीमिया के कारण हो सकते है |

एनीमिया के उपचार एवं रोकथाम
डायटीशियन सुषमा एनीमिया के उपचार एवं रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपायों को अपनाने की सलाह देती है
– अगर एनीमिया मलेरिया या परजीवी कीड़ों के कारण है, तो पहले मलेरिया या परजीवी कीड़ों का इलाज कराये |
– लौह तत्वयुक्त भोजन का सेवन करे , जैसे – बाजरा, गेहूं का आटा (चोकर सहित), जौ (बार्ली), गेहूं का दलिया, उसना चावल, सूजी, चूड़ा, मुरही (चावल का मुढ़ी या मुरही) |
– हरी पत्तेदार सब्जी, लाल साग, चुकंदर का पत्ता, चना का साग, फूलगोभी का पत्ता, पुदीना, सरसों का साग, शलगम का पत्ता, पत्तागोभी, सहजन का पत्ता, करी पत्ता, पालक, धनिया पत्ता का सेवन करें |
– हरा प्याज, आंवला, छुहारा, हरा केला का सेवन करें |
– विटामिन ‘ए’ और ‘सी’ युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करे |
– गर्भवती एवं किशोरी लड़कियों को नियमित रूप से आयरन की गोली का सेवन करना चाहिए |
– महिलाओं को जल्दी-जल्दी गर्भधारण से बचना चाहिए |
– फोलिक एसिड का उपयोग करना चाहिए | शरीर में स्वस्थ्य लाल रक्त कण बनाने के लिए फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है | फोलिक एसिड की कमी से भी एनीमिया की बीमारी होती है | गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, मूंगफली, अंडे, मशरूम, मटर, फलिया, चोकर युक्त आटा, डालें, सूखे मेवे, मांस, मछली, गुड़, बाजरा , शलजम, अनानास फोलिक एसिड के मुख्य स्त्रोत है |

डायटीशियन सुषमा यह भी सलाह देती है की जब भी आपको लगे की आप एनीमिया की शिकार है, आप अपने पारिवारिक डॉक्टर से जरूर संपर्क करे और उनके सलाह के अनुसार ही कोइ भी दवा का उपयोग करें |

लेखिका : डायटीशियन ‘सुषमा सुमन’
आहार विशेषज्ञ सलाहकार – फ़्रेसेनियस काबी एवं लाइफ केयर फिजिओथेरपी एन्ड रिहैबिलिटेशन सेंटर, पटना

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