स्तनपान जरुरी एवं महत्वपूर्ण हैं शिशु के लिए : डॉ. वंदना

स्तनपान जरूरत एवं महत्वपूर्ण हैं शिशु के लिए |
फिगर पर मत दे ध्यान, शिशु को करवाए स्तनपान ||

डॉ. वंदना के अनुसार जन्म के एक घंटे के बाद ही माँ की गुणकारी दूध शिशु को पिलाना शुरू कर देना चाहिए |

स्तनपान करने के फायदे :-
बच्चे को प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। स्तन कैंसर की समस्या या स्तन में गाँठ की समस्या से बचाव होता है | माँ और शिशु के साथ धड़कन का स्पर्श होता है, जिस वजह से शिशु का मानसिक और शारीरिक विकास होता है |

डॉ. वंदना के अनुसार स्तनपान करते समय कुछ सावधानिया भी माँ को बरतनी चाहिए जैसे –  माँ अपने  दोनों हाथों को साफ रखें, माँ दोनो स्तन में से बराबर दूध पिलाते रहे, स्तनपान कराने बाली माँताये को खुद साफ-सफाई का भी ख्याल रखना चाहिए, माँ को सूती कपड़े पहनना चाहिये, दूध पिलाने से पहले स्तन को सूती कपड़ा से हमेशा साफ करना चाहिये, दूध पिलाने के बाद शिशु को पीठ थपथपाना चाहिये, प्रतिदिन शिशु के जीभ को सूती कपड़े से साफ करना चाहिए क्योंकि इससे शिशु को दूध आसानी से पाचन होती है और उल्टी की समस्याओं से दूर भी रहते है बच्चे ।
अनीमिया के लक्षण :-
कमजोरी, घबराहट, भूख कम लगना, चक्कर आना, जोड़ो में खिंचाब आना, कम्पन्न आना,  हमेशा चिड़चिड़ापन रहना।

(नोट:-कुछ महत्वपूर्ण बातें जो माताओं के लिये जो माँ स्तनपान कराती है उन्हें खुद के स्वास्थ्य के लिये भी फल और हरे पतेदार सब्जी जिसमें हरी मटर , गाजर यबम चुकंदर आवश्य रूप से ले , दूध खूब पियें , इससे दूध की मात्रा भी बढ़ जाती जससे आपका शिशु का भी पेट हमेशा भरा रहेता है और माँ भी स्वस्थ रहती है क्योंकि माँ स्वास्थ तो बच्चे भी स्वस्थ, 6 महीनों तक माँ शिशु को अपना दूध ही सिर्फ पिलायें, 6 महीनों के बाद थोड़ा बहुत दिन भर में एक से दो बार दाल का पानी दे सकते है,  शिशु को केबल दो वर्षों तक ही स्तनपान करबाए,  दो बच्चों के बीच काम से कम तीन बरसों का अंतराल रखें।

लेखिका : डॉ. वंदना ठाकुर
बुद्ध होमियो सेवा सदन, सराय, वैशाली, हाजीपुर

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